रूस- यूक्रेन युद्ध का असर पूरी दुनिया पर!


Rakhi Yadav, 31 March 2022

24 फरवरी को रूस द्वारा यूक्रेन पर किए गए हमलें ने यूक्रेन में तबाही मचा दी। पिछले 1 महीने में यूक्रेन के कई शहर खंडहर हो चुके हैं। रूस के हमले से यूक्रेन की हालत तो खस्ता हुई ही, साथ ही अब रूस में भी आर्थिक तबाही मची हुई है। कई अंतरराष्ट्रीय कंपनियों ने रूस में अपना बिजनेस बंद कर दिया है। जिसमें से ट्विटर, फेसबुक, गूगल,नेटफलिक्स, वीजा आदि कंपनियां शामिल है। साथ ही अमेरिका और कई यूरोपीय देशों ने रूसी उड़ानों पर पाबंदी लगा रखी है। इस युद्ध के कारण सिर्फ यूक्रेन और रूस पर ही आर्थिक संकट नहीं गहराता जा रहा, बल्कि भारत समेत दुनियाभर के अन्य देशों के सामने आर्थिक चुनौतियां खड़ी हो रही हैं।

रूस और यूक्रेन, ऊर्जा, खाद्य-पदार्थ तथा रसायन के बड़े निर्यातक हैं और गेहूं निर्यात में इन दोनों देशों की 30 फ़ीसदी की भागीदारी है, ऐसे में दुनिया भर के अन्य देशों पर युद्ध का असर पड़ना स्वाभाविक है। ये दोनों देश, दक्षिण एशिया और अफ्रीका के कई देशों के लिए ब्रेड बास्केट के रूप में जाने जाते हैं। यह खाद्य तेल, मक्का और सोयाबीन के साथ ही सूरजमुखी तेल के भी बड़े निर्यातक हैं |यूक्रेन, दुनिया का आधा सूरजमुखी तेल का निर्यातक रहा है। वहीं, भारत 93 प्रतिशत सूरजमुखी तेल यूक्रेन और रूस से आयात करता है। इन सभी खाद्य पदार्थों की सप्लाई बंद होने पर दुनिया के कई देशों पर खाद्य संकट की संभावना है।

दुनिया भर में उन वस्तुओं की कमी होना लाजमी है, जिनके बड़े निर्यातक रूस और यूक्रेन हैं| वस्तुओं की कमी होने के डर से विभिन्न देश वस्तुओं का भंडारण करने में लग गए हैं। साथ ही इन देशों ने कई वस्तुओं का निर्यात भी कम कर दिया है।मिस्र ने गेहूं और दालों का, इंडोनेशिया ने पाम तेल का निर्यात कम कर दिया है। भारत समेत अन्य कई देशों में खाने में पाम तेल का ही इस्तेमाल होता है।

भारत में इस युद्ध का सीधा असर महंगाई पर दिख रहा है। कच्चे तेल और खाद्य पदार्थ की कीमतों में इजाफा हो रहा है।भारतीय सेना में 60 फ़ीसदी हथियार रूसी हैं|रूस भारत को हथियारों के पुर्जों की भी सप्लाई करता है| हालांकि अभी तो रूस के सीधे आयात से भारत को कोई मुश्किल होती नहीं दिख रही है, परंतु आगे के लिए यह चुनौती बन सकती हैं।

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमत करीब 82 डॉलरप्रति बैरल से बढ़कर 120 डॉलर के करीब पहुंच गई है। भारत,कच्चे तेल का लगभग 85 फीसदी निर्यात करता है, कच्चे तेल की कीमतों के बढ़नेका सीधा असर भारत की अर्थव्यवस्था पर होगाइसके अलावा पेट्रोल-डीजल के दामों में भी बढ़ोतरी हो रही है। एसी, लैपटॉप, कंप्यूटर समेत कई इलेक्ट्रॉनिक सामानों के दर में भी वृद्धि हो सकती है, क्योंकि लैपटॉप, कंप्यूटर आदि में लगाई जाने वाली चिप में नियॉन गैस का इस्तेमाल होता है, और इस गैस का बड़ी निर्यातक यूक्रेन की दो कंपनियां (इनगैस और क्रायोइन) हैं। विश्वभर की कंपनियांकोरोना महामारी के कारण पिछले दो वर्षों से चिप की कमी का पहले ही सामना कर रही हैं, अब इनकी न्यूनता और बढ़ने वाली है

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